Patna में चल रही बिहार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इस बार बहस का विषय राजनीति से आगे बढ़कर राज्य के पारंपरिक व्यंजन बन गए। सदन में बाढ़ की मशहूर लाई, मनेर के लड्डू, गया के तिलकुट और बड़हिया के रसगुल्ले को लेकर दिलचस्प चर्चा हुई।
उद्योग मंत्री Dilip Jaiswal ने जानकारी दी कि बाढ़ की प्रसिद्ध ‘खूबी की लाई’ को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पहले भी कई उत्पादों को GI टैग दिला चुकी है और अन्य पारंपरिक उत्पादों के लिए भी प्रयास जारी हैं।
विधानसभा अध्यक्ष Prem Kumar ने बताया कि Gaya के प्रसिद्ध तिलकुट के लिए भी GI टैग का आवेदन किया गया है। इस बीच उपमुख्यमंत्री Vijay Sinha ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि “मंत्री जी बड़हिया का रसगुल्ला और बाढ़ की लाई तो खाते हैं, लेकिन GI टैग के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करते।” इस पर सदन में ठहाके भी लगे।
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने Maner के मशहूर लड्डू का मुद्दा उठाया और उसे भी GI टैग दिलाने की मांग की। वहीं Muzaffarpur में मक्का आधारित उद्योग और एथेनॉल प्लांट को लेकर सरकार ने औद्योगिक विकास की योजनाओं पर भी बयान दिया।
इस ‘मिठास भरी’ बहस ने सदन का माहौल हल्का कर दिया, लेकिन साथ ही यह संदेश भी दिया कि बिहार के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में सरकार गंभीर है।

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