Monday, 12 January 2026

ईरान संकट में ट्रंप फंसे इंदिरा गांधी जैसी दुविधा में, अमेरिकी सेना ने जल्दबाज़ी से किया आगाह


 अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को समर्थन देने का मन बना लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक व्हाइट हाउस में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, जहां सैन्य कार्रवाई, साइबर अटैक और इंटरनेट सपोर्ट जैसे कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि अमेरिकी सेना ने ट्रंप को जल्दबाज़ी से कदम न उठाने की सलाह दी है। यह स्थिति 1971 में इंदिरा गांधी और जनरल सैम मानेकशॉ के बीच हुई चर्चा जैसी बताई जा रही है, जब सेना ने तैयारी के लिए समय मांगा था।

सूत्रों के अनुसार ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों, इंटरनेट ब्लैकआउट और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने अमेरिका को सक्रिय होने पर मजबूर किया है। वहीं इज़रायल ने फिलहाल सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप से दूरी बनाते हुए अमेरिका को आगे बढ़ने देने का फैसला किया है।

अमेरिका के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं—कुछ सांसदों को डर है कि सैन्य कार्रवाई से ईरानी जनता सरकार के पक्ष में आ सकती है, जबकि कुछ नेता प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन देने के पक्ष में हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा।


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